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Bhopal will be the cleanest city in the country, BMC will clear garbage -
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Bhopal will be the cleanest city in the country, BMC will clear garbage

Bhopal will be the cleanest city in the country, BMC will clear garbage

(आदमपुर छावनी स्थित खंती में अभी हालात यही हैं, इन्हें बदलने के लिए नगर निगम ने काम करना शुरू कर दिया है। )
भोपाल अगले एक साल में देश का सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है। भोपाल नगर निगम ने इसके लिए काम करना शुरू कर दिया है। दो सप्ताह पहले नागपुर की ग्रीन रिर्सोसेस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इस टेंडर के तहत यह कंपनी अगले 1 साल में (बारिश के महीनों को छोड़कर) पिछले 5 सालों के दौरान जमा 6.5 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करेगी।

रोज निकलने वाले 1000 टन मीट्रिक टन कचरे का भी होगा निपटारा : 
साथ ही यहां रोज जमा होने वाले 1000 मीट्रिक टन कचरे को भी सही तरीके से निपटारा किया जाएगा। इसके लिए कंपनी ने युद्ध स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है। खंती में कचरे से वायु और जल प्रदूषण न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। साथ ही कचरे से खाद और अन्य प्रोडक्ट भी तैयार कर मार्केट में बेचे जाएंगे। 

(तीन मशीनों की सहायता से यहां खाद बनाई जा रही है, जिन्हें किसानों और विभिन्न नर्सरियों को बेचा जाएगा।)
रोजाना निकलने वाला 40 प्रतिशत कचरा होता है जैविक, इसी से बनेगी खाद :
खंती में रोजाना आने वाले कचरे में से 40 प्रतिशत कचरे से खाद बनाने की तैयारी है। रोजाना निकलने वाले कचरे में से 40 प्रतिशत गीला कचरा होता है, जिसमें सब्जियाें के छिलके, चायपत्ती, पत्तियां, अनाज और इसी तरह का कचरा होता है, जिसे प्रोसेस करके खाद बना लिया जाएगा और इस जैविक खाद को किसानों, नर्सरियों, नगर निगम को दिया जाएगा।
साथ ही कचरे से रस्सी बनाने की भी तैयारी है, जिसे मार्केट में बेचा जाएगा। इस तरह निगम रोजाना 400 टन जैविक खाद तैयार करेगा, जिसे बेचकर निगम का खाली खजाना भी भरने की तैयारी है।

(रिसाइकल कचरे को भी बेचने की तैयारी है, जिससे अतिरिक्त कमाई होगी।)
प्लास्टिक, कांच और लोहे का 30 प्रतिशत कचरा होगा रिसाइकल :
प्लांट से निकलने वाले 30 प्रतिशत कचरे को रिसाइकल किया जाएगा, जिसमें कांच की बाेतल, प्लास्टिक और मेटल शामिल है। इस कचरे को अलग-अलग करके बेच दिया जाएगा, जिसके बाद इनका उपयोग फिर से हो सकेगा।
कंपनी द्वारा पिछले 15 दिनों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, कांच और लोहे को अलग करने का काम किया गया है और इसे संबंधित फैक्ट्रियों को बेचा गया है। इसके लिए भी रोजाना बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। साथ ही बाकी बचा कचरा किसी काम का नहीं जिसका वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। 

(जो कचरा उपयोग नहीं हो सकेगा उसे लैंडफिल किया जाएगा।)
30 प्रतिशत कचरा ऐसा जो उपयोगी नहीं, जिसे किया जाएगा लैंडफिल :
रोजाना खंती पहुंचने वाले कचरे में 30 प्रतिशत कचरा ऐसा होता है, जिसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे कचरे को वैज्ञानिक तरीके से लैंडफिल किया जाएगा। इसके लिए दो अंडर ग्राउंड टैंक बनाए जा रहे हैं। पहला टैंक 2.5 एकड़ का है, वहीं दूसरा टैंक 3.5 एकड़ का है। इस कचरे से लीचेट (गंदा पानी) निकलता है, जिसे भूजल से मिलने से रोकने के लिए उन्हें अंडर ग्राउंड टैंक में डालकर लैंडफिल किया जाएगा।
इसके लिए दो लेयर टैंक के अंदर जमीन में बिछाई जाएंगी। पहली लेयर प्लास्टिक की होगी। उसके ऊपर कपड़े की लेयर होगी। इस टैंक में कचरे को डालकर उसे लैंड फिल कर दिया जाएगा।

(निगम ऐसी तीन ट्रॉमल मशीनों से कचरे को प्रोसेस करने का काम करेगा।)
तीन ट्रॉमल, कचरे से खाद और कचरा अलग करते हैं :
कंपनी द्वारा यहां तीन ट्रॉमल मशीनें लगाई गई हैं, जो कचरे से खाद और उपयोग न होने वाले कचरे को अलग करती हैं। यह मशीनें दिन में 10 घंटे काम करेंगी, और कचरे व खाद को अलग करेंगी। खाद को बाद में बोरियों में पैक कर बेच दिया जाएगा।
फिलहाल ऐसी तीन ट्रॉमल मशीनें खाद बनाने और कचरे को प्रोसेस करने का काम कर रही हैं। तीन मशीनों की क्षमताएं अलग-अलग हैं। इनसे फिलहाल से खाद बनाने के लिए 8 से 10 घंटों तक काम लिया जा रहा है।


9 माह में खत्म होगा 44 एकड़ में फैला 6.5 लाख मीट्रिक टन कचरा :
नगर निगम द्वारा ग्रीन रिर्सोसेस को 9 माह में 44 एकड़ क्षेत्र में फैले कचरे को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस दौरान वायु और जल प्रदूषण न हो इसका भी खास ध्यान रखने को कहा गया है। जिस तकनीक पर ग्रीन रिर्सोसेस काम कर रही है। यह तकनीक चीन, जापान और कुछ यूरोपीय देशों के पास है। यदि सब ठीक रहा तो इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल फिर नंबर 1 साबित होगा।

(कचरे से तैयार कपड़े की रस्सी)
साथ ही कचरे से कुछ अन्य ईको फ्रेंडली और रिसाइकल प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे, जिसका उपयोग अलग अलग कामों में किया जाएगा। कचरे से निकलने वाले कपड़ों से कपड़े की रस्सी बनाने की तैयारी है। वहीं लोहे से निगम कबाड़ खटिया बनाने की भी तैयारी कर रहा है। इस खटिया में कचरे से बनी रस्सी का ही उपयोग किया जाएगा। इसका एक सैंपल आदमपुर छावनी स्थित ग्रीन रिर्सोसेस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में रखा गया है। 

(ग्रीन रिसोर्सेस द्वारा बनाई गई लोहे की खटिया और कचरे से तैयार रस्सी)

इनका कहना है :
भोपाल नगर निगम से हमें तीन सप्ताह पूर्व टैंडर मिला है। इस टैंडर के तहत हमें 44 एकड़ में फैले कचरे को प्रोसेस कर उसे खत्म करना होगा। साथ ही इस पूरी जगह को ज्यादा से ज्यादा खाली कर कब्जा निगम को सौंपना होगा। 
-अजीत नयन, प्रोजेक्ट हेड
ग्रीन रिर्सोसेस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड

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