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Irrigation Of Crops Caused By Chemical Water And Sewage Coming Out Of Sarita Setu -
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Irrigation Of Crops Caused By Chemical Water And Sewage Coming Out Of Sarita Setu

Irrigation Of Crops Caused By Chemical Water And Sewage Coming Out Of Sarita Setu

बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित सरिता सेतु से सीवेज वॉटर को फसलों की सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा है। दरअसल 2 दशक पहले भेल ने अपने टाउनशिप से निकलने वाले रासायनिक पानी और सीवेज के ट्रीटमेंट के लिए एक योजना बनाई थी। इस याेजना के अनुसार भेल टाउनशिप से निकलने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में साफ कर एक जगह इकट्‌ठा किया जाना था।

(सरिता सेतु से निकल रही मुख्य नहर, जो बर्रई जाकर दो भागों में बंट जाएगी।)

बाद में इस पानी को सिंचाई विभाग नहर के माध्यम से भोपाल और रायसेन के कई गांवों को सिंचाई के लिए भेजने वाला था। इसके लिए सिंचाई विभाग ने बागमुगालिया एक्सटेंशन में सरिता सेतु का भी निर्माण किया, लेकिन हाउसिंग बोर्ड की आपत्ति के कारण सरिता सेतु का निर्माण रुक गया और भेल ने भी अपने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को कंप्लीट नहीं किया।

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बोवनी के दौरान 20 गांव सीवेज से करते हैं सीवेज : 
हर साल बोवनी के दौरान भोपाल और रायसेन के 20 से ज्यादा गांव इसी जहरीले पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। दिसंबर से जनवरी के दौरान सिंचाई विभाग नहर के माध्यम से इस पानी को छोड़ता है। पानी में खतरनाक रसायन और केमिकल होने के कारण इससे खतरनाक झाग भी बनता है। इसी जहरीले पानी से फसलों और सब्जियों की सिंचाई की जाती है। 

(रसायनों के कारण पानी से जहरीला झाग निकलता हुए देखा जा सकता है।)

इस संबंध में कई बार बागमुगालिया और कटारा के लोग अपनी आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन इस समस्या के निदान के लिए भेल और सिंचाई विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को गंभीर बीमारियों से जूझकर चुकाना पड़ रहा है। 

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इन गांवों तक जा रहा है जहरीला पानी : 
इस नहर का पानी सरिता सेतु से आम्रपाली मार्केट होते हुए कटारा और यहां से बर्रई तक जा रहा है। बर्रई जाकर यह नहर दो भागों में बंट जाती है। जिसमें से डी-1 नहर बर्रई ग्राम की ओर मुड़ जाती है, जबकि एम-6 बर्रई से रायसेन रोड की ओर सीधी निकल जाती है। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक मुख्य नहर डी-1 से अमजरा, झागरिया, बांसिया, जामुनिया, धाकड़ पिपलिया में फसलों की सिंचाई होती है।

(बर्रई के सामने से निकल रही डी-1 कैनाल जिसका पानी 6 से ज्यादा गांवों में भेजा जाता है)

जबकि एम-6 से भोपाल और रायसेन की सीमा पर स्थित कई गांवों में फसलों की सिंचाई होती है। जानकारों के अनुसार इस झाग युक्त पानी से फलदार वृक्षों और सब्जियों की सिंचाई करना बहुत खतरनाक है।   

(एम-6 कैनाल जिसका पानी भोपाल और रायसेन के एक दर्जन से ज्यादा गांवों में भेजा जाता है।)

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नहीं बन सका भेल का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट : 
भेल के अधिकारी इस संबंध में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की बात पिछले 2 दशकों से कह रहे हैं, लेकिन अब तक किसी तरह का कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी सेहत के साथ समझौता करके चुकाना पड़ेगा। वहीं सरिता सेतु के कारण बागमुगालिया एक्सटेंशन और यहां स्थित कई कॉलोनियों का ग्राउंड वाटर भी प्रदूषित हो चुका है। 


वहीं सिंचाई के दौरान यह पानी खेतों के माध्यम से भू-जल को भी प्रदूषित करेगा। यदि एक बार ग्राउंड वाटर प्रदूषित हो जाए तो इसे शुद्ध होने में दो से तीन दशक का समय लग जाता है, लेकिन इस गंदे पानी से पिछले 20 सालों से इसी तरह सिंचाई जारी है।

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सब्जियों की सिंचाई के लिए घातक : 
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डाॅ. सुनील स्नेही के अनुसार इस तरह का केमिकल युक्त पानी सब्जियों और फलों की सिंचाई के लिए खतरनाक है। इस पानी लेड, आर्सेनिक जैसी भारी धातुओं के साथ-साथ ई कोलाई भी होता है। इन सबकी पर्त फलों-सब्जियों पर जम जाती है। इससे डायरिया, ज्वाइंडिस, हेपेटाइटिस बी जैसी खतरनाक बीमारियों के होने का खतरा रहता है।  

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