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गुरुत्वाकर्षण के कारण घूमते-घूमते लडखड़ा जाता है शनि का मीमास, उपग्रह पर पानी की मौजूदगी का पता लगा रहे हैं वैज्ञानिक  -
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NASA is detecting the presence of water on Saturn's moon Mimas

NASA is detecting the presence of water on Saturn's moon Mimas
Saturn's Moon Mimas

वॉशिंगटन। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारी पृथ्वी पर मौजूद महासागरों से कई गुना ज्यादा हम हमारे सौरमंडल और अंतरिक्ष के बारे में जानते हैं। हमारे सौरमंडल के विभिन्न गृहों के बारे में आए दिन नई नई खोजें होती रहती हैं। ऐसी ही एक नई जानकारी अमेरिका की अंतरिक्ष से जुड़ी खोजें करने वाली एजेंसी नासा ने जारी की है।

नासा ने हमारे सौरमंडल के शनि और बृहस्पति गृहों के चंद्रमाओं का अध्ययन करने के बाद कहा है कि इन उपग्रहों की सतह के नीचे पानी के विशाल सागर मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में यदि इन ग्रहों पर पानी मौजूद होगा, तो यहां जीवन होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

मीमास पर दिखाई देते हैं विशालकाय गड्ढे :
नासा ने शनि के चंद्रमा मीमास पर पिछले एक दशक से ज्यादा समय से किए जा रहे अध्ययन के बाद बताया है कि इस उपग्रह पर पानी मौजूद हो सकता है। हालांकि मीमास पर मौजूद विशालकाय गड्ढों के कारण यहां बर्फ के महासागर की मौजूदगी से एजेंसी ने इंकार किया है। दरअसल बर्फीली दुनिया आमतौर पर चिकनी सतह वाली होती है।

अपनी धुरी पर घूमते हुए लड़खड़ा जाता है मीमास :
लंबे समय से मीमास पर अध्ययन कर रहे नासा के कैसिनी मिशन ने कहा है कि मीमास अपनी धुरी पर जैसे ही घूमना शुरू करता है। यह थोड़ा लड़खड़ा जाता है। दरअसल ज्वारीय बल के कारण ग्रह की ओर खिंचने और शिथिल हो जाने के कारण यह महासागर अंदर से काफी गर्म हाे जाता है। साथ ही इसकी बर्फ भी टूट जाती है। इसी कारण महासागर बनने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

महासागर होने के पक्के सबूत नहीं हैं मौजूद :
हालांकि कहा गया है कि अब तक मीमास पर महासागर मिलने की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है, लेकिन उपग्रह पर पानी का पता लगाने के लिए यहां अभी और शोध करने की जरूरत है। एजेंसी ने कहा है कि साथ ही शनि के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण भी उपग्रह इस तरह की गति कर सकता है।

गुरुत्वाकर्षण हो सकता है इसके पीछे की वजह :
इसे इस तरह से समझा जा सकता है, जैसे पृथ्वी के चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण हमारे महासागरों का पानी आगे पीछे होता है। जिससे ज्वार भाटा बनता है। शनि और मीमास के बीच भी यही प्रतिक्रिया उपग्रह पर ऊर्जा का निर्माण कर सकती है। इसी कारण उपग्रह की बर्फ पिघलकर एक भूमिगत महासागर का रूप ले सकती है।

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