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Panchmukhi Hanuman Of Bhopal, Where Darshan Ends Serious Illnesses -
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Panchmukhi Hanuman Of Bhopal, Where Darshan Ends Serious Illnesses

Panchmukhi Hanuman Of Bhopal, Where Darshan Ends Serious Illnesses

भोपाल में अल्पना टॉकीज के पीछे बसी रेलवे कॉलोनी स्थित प्राचीन पंचमुखी हनुमान मंदिर यहां होने वाले चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर के चारों ओर बड़े-बड़े वृक्ष स्थित हैं और आसपास कोई बड़ी सड़क न होने के कारण यहां दिन भर शांति का माहौल रहता है, लेकिन यहां जाे श्रद्धालु नियमित रूप से आते हैं। वो यहां अक्सर होने वाले चमत्कारों के बारे में बताते रहते हैं। श्रद्धालुओं के मुताबिक इस मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं और यहां कई लोगों को गंभीर से गंभीर रोगों से निजात मिल चुकी है। 


मंदिर परिसर में एक ओर पंचमुखी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा विराजमान है। इस प्रतिमा के साथ ही एक अन्य दक्षिण मुखी प्रतिमा भी इस मंदिर में विराजित की गई है, जिसे मंदिर की मुख्य प्रतिमा बताया जाता है। विशाल प्रतिमा के ठीक सामने भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। जिनकी सेवा में हनुमान जी की एक अन्य प्रतिमा विराजित की गई है।  

योगीराज रामचरण दास बाबा ने की थी स्थापना : 
इस मंदिर की स्थापना योगीराज रामचरण दास जी ने की थी। रामचरण दास जी लगभग 100 साल पहले भोपाल आए थे। उस दौरान भोपाल में नवाबी शासन था और यहां भजन-कीर्तन करने की मनाही थी। इस दौरान योगीराज रामचरण दास जी द्वारा छोला स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर में 108 रामचरित मानस के पाठ करवाए गए थे।

(समाधिष्ठ संत योगीराज रामचरण दास जी महाराज)

इसकी जानकारी जब भोपाल नवाब को लगी तो उन्होंने अपने पहरेदार छोला मंदिर भिजवाए थे, लेकिन रामचरण दास जी के पास पहुंचकर सभी उनके भक्त बन गए। बाद में नवाब हमीदुल्ला खां को जब इसकी जानकारी लगी तो वे स्वयं छोला खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे और रामचरण दास जी की योग सिद्धियां देख नतमस्तक हो गए।

बाद में रामचरण दास जी के कहने पर नवाब ने उन्हें रेलवे कॉलोनी स्थित वर्तमान जगह पर मंदिर निर्माण की अनुमति दी थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार योगीराज रामचरण दास जी वृंदावन के ख्यात संत योगिराज देवराहा बाबा के प्रथम शिष्य थे। 

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तपस्या के बाद प्रकट हुई थी हनुमान जी की प्रतिमा : 

(हनुमान जी की मुख्य प्रतिमा जो स्वयं प्रकट हुई थी)

योगीराज रामचरण दास जी की तपस्या के बाद इस जगह से हनुमान जी की एक प्रतिमा जमीन से निकली थी। लगभग 15 फीट तक खुदाई करने के बाद जमीन के अंदर से हनुमान जी की प्रतिमा प्रकट हुई, जिसे कोई भी व्यक्ति उठा नहीं पा रहा था। अंत में स्वयं रामचरण दास जी ने गड्‌ढे के अंदर उतरकर प्रतिमा को ऊपर लेकर आए थे और विधि विधान के साथ इसकी स्थापना की।

बाद में शास्त्रों में वर्णित जानकारी के अनुसार यहां पर पंचमुखी हनुमान जी की भी स्थापना की गई। पंचमुखी हनुमान जी की ऐसी प्रतिमा संपूर्ण भारत में किसी अन्य स्थान पर नहीं है। 

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देवराहा बाबा की ही तरह योग सिद्ध थे बाबा रामचरण दास : 
रामचरण दास जी महाराज के 1984 में चोला छोड़ने के बाद मंदिर की जिम्मेदारी योगीराज जंगलीदास जी महाराज जी ने संभाली। उनके बाद वर्तमान में मंदिर परिसर की जिम्मेदारी श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर रामभूषण दास जी महाराज संभाल रहे हैं।

(श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर रामभूषण दास जी महाराज, जो वर्तमान में मंदिर समिति के अध्यक्ष हैं)

रामभूषण दास जी इस मंदिर के बारे में बताते हुए कहते हैं कि योगीराज देवराहा बाबा की ही तरह योगीराज रामचरण दास जी ने पंचतत्वों को अपने अधीन कर रखा था। 

देवराहा बाबा की ही तरह वे कई तरह की योग सिद्धियों में पारंगत थे और उनका उपयोग मानव कल्याण के लिए करते थे। 

कौन थे देवराहा बाबा : 

(योगीराज देवराजा बाबा, जिनके दर्शन करने नेहरू और गांधी परिवार के सदस्य अक्सर वाराणसी और वृंदावन जाया करते थे)

योगीराज देवराहा बाबा को आधुनिक भारत के सबसे विचित्र और सिद्ध संतों में से एक माना जाता है। देवराहा बाबा ने अपनी साधना वृंदावन से शुरू की थी और बाद में वे वाराणसी में गंगा तट के पास एक मंच पर अपनी कुटिया बनाकर रहते थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी देवराहा बाबा के दर्शन करने अक्सर जाया करते थे। वहीं विहिप प्रमुख अशोक सिंघल और भारत सरकार के कई अधिकारी उनके परम भक्त थे।

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